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Thursday, 28 July 2016

3000 से ज्यादा पुलिसवाले और 21 IPS ऑफिसर इस डॉन के पीछे हैं

दावूद के FAN की अनसुनी कहानी,

3000 से ज्यादा पुलिसवाले और 21 IPS ऑफिसर इस डॉन के पीछे हैं लेकिन इस डॉन का कहना है मुझको पकड़ना मुश्किल ही नामुमकिन है .रेगिस्तान से चंबल तक इस डॉन की तलाश है. इस डॉन के डर का सिक्का राजस्थान , मध्यप्रदेश, हरियाणा और यूपी में चलता है. इस डॉन की कहानी जान आपके भी होश उड़ जाएंगे. आगे की स्लाइड्स में जानें इस डॉन की दिल दहला देने वाली दास्तां!
आनंदपाल को पुलिस हिरासत से फरार हुए 9 महीने हो चुके हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और यूपी की पुलिस आनंदपाल की तलाश में हैं लेकिन आनंदपाल कहां है किसी को पता नहीं है.
आनंदपाल जितना खतरनाक डॉन है उसकी कहानी उतनी ही फिल्मी और दिलचस्प है. बरसों पहले आई संजय दत्त की फिल्म वास्तव की कहानी आनंदपाल की जिंदगी से मिलती जुलती है. जिस तरह संजय दत्त फिल्म में गुनाहों के दलदल में फंसते हैं उसी तरह असल जिंदगी में आनंदपाल भी जुर्म की दुनिया में घुसता है.
पढ़ाई में तेज, फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाला, बीए बीएड की डिग्री लेने वाला आनंदपाल टीचर बनना चाहता था. जब वो टीचर नहीं बन सका तो राजनीति में आ गया. आनंदपाल ने पंचायत समिति का चुनाव भी लड़ा. लेकिन वो चुनाव हार गया.
राजस्थान में नागौर के छोटे से गांव सावरदा से ताल्लुक रखने वाला आनंद पाल भी परिवार का नाम रोशन करने की इच्छा रखता था लेकिन उम्मीद से ज्यादा पाने और राजनैतिक दुश्मनी ने उसे जुर्म की दुनिया में ला खड़ा किया. उसने सबसे पहला जुर्म ही हत्या कर अंजाम दिया. इसके बाद पुलिस और दुश्मन गैंग के बदमाश जब पीछे पड़ गए तो आनंदपाल राजस्थान का सबसे बड़ा गैंगस्टर बन गया.
38 साल के हो चुके आनंदपाल ने सबसे पहले राजस्थान के हिस्ट्रीशीटर और बदमाशो को मारा उसके बाद उसने अपनी एक गैंग बनाई और फिर उसके वो राजस्थान की राजनीति में घुस गया. कई नेताओं के मर्डर , अपहरण, लूट जैसे उस पर 3 दर्जन से ज्यादा संगीन मामले दर्ज है. आनंदपाल के पास एके 47 जैसे कई आधुनिक हथियार भी हैं. आनंद ने 2006 में डीडवाना में जीवनराम गोदारा हत्याकांड को अंजाम दिया था उसी दौरान चर्चा वो में आया. साल 2012 में जयपुर के पास आनंदपाल गिरफ्तार हुआ तो उसके पास बुलेटप्रुफ जैकेट और एके 47 राइफल मिली थी लेकिन आनंद 3 सितंबर 2015 में पुलिस पर हमला कर भाग निकला.
देश के मोस्ट वांटेड डॉन दाऊद इब्राहिम को आनंदपाल अपना हीरो मानता है. दाऊद को देखकर ही आनंदपाल जुर्म की दुनिया में आया. उसकी तरह चलने का तरीका शानदार कपड़े, चश्मा लगाने का स्टाइल सब कुछ दाऊद की तरह.
आनंदपाल को दाऊद पर लिखी किताबें पढ़ने का भी शौक है. खुद को दाऊद की तरह दिखाना और कहलवाना पसंद करता है आनंदपाल. जैसे फिल्म वास्तव में गैंगस्टर बने संजय दत्त को उसकी मां गोली मार देती है वैसे ही असली डॉन आनंदपाल की मां भी कहती है कि उसे अगर अपने बेटे का पता चलेगा तो पुलिस के पास सबसे पहले वो ही जाएगी.
आनंदपाल कितना कुख्यात गैंगस्टर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसकी तलाश में तीन हजार से ज्यादा पुलिस और 21 आईपीएस अफसर लगे हुए हैं. इतनी बड़ी फौज मिलकर भी आनंदपाल की परछाई को छूने में भी नाकाम रही है
हाल ही में आनंदपाल का साथी पंकज गुप्ता पुलिस की स्पेशल टीम के हत्थे चढ़ा था उसी की निशानदेही पर राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस ने ग्वालियर में एक मकान पर छापा मारा लेकिन आनंदपाल तब तक यहां से निकल चुका था.
खबर है कि अब आनंदपाल चंबल के बीहड़ों में छिपा हुआ है, पुलिस की कई टीमें चम्बल में उसकी तलाश कर रही हैं आनंदपाल पिछले साल 3 सितम्बर को डीडवाना इलाके में पेशी से लोटते समय फिल्मी स्टाइल में फरार हो गया था. आनंदपाल को छुड़ाने के लिए कई पुलिसवालों को गोली भी मारी गई थी.
डीडवाना के पास ये वही परबतसर जगह है जहां से आनंदपाल अपने साथियों की मदद से फरार हुआ था. आनंदपाल के फरारी कांड में अब तक सात लोग पकड़े जा चुके हैं. और आनंदपाल पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है.
आनंदपाल की तलाश के बीच पुलिस के लिए बड़ा कामयाबी ये रही है कि उसकी करीबी और लेडी डॉन अनुराधा को एक पुराने मामले में कोर्ट ने दो साल कैद की सजा सुनाई है. आनंदपाल के कई साथियों को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी पकड़ चुकी है लेकिन आनंदपाल तक पुलिस अब तक नहीं पहुंच पाई है.

Tuesday, 26 July 2016

कानून से खिलवाड़ किया तो दो घंटे में ही सबक सिखा देंगे !!!!

कानून से खिलवाड़ किया तो दो घंटे में ही सबक सिखा देंगे !!!!
अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहने वाले उत्तर प्रदेश के सपा मंत्री एवं नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां कानून व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर दिखे। उन्होंने विरोधियों को भी ललकारा। बोले, छह महीने तो बहुत हैं अगर किसी ने कानून से खिलवाड़ किया तो दो घंटे में ही सबक सिखा दिया जाएगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके नेताओं का मकसद विकास नहीं दंगे कराना रहता है।
आजम खां ने हौसला पोषण योजना के शुभारंभ के मौके पर पहले मुजफ्फरनगर और कैराना का जिक्र किया। बोले, मुजफ्फनगर में भाजपा ने ही दंगा कराया। इसके बाद कैराना का सहारा लेकर पूरे प्रदेश में दंगा कराने का मंसूबा बनाया। इतना कहकर आजम खां ने सख्त लहजे में कहा है कि कान खोलकर सुन लो। किसी ने दंगा किया तो सख्ती से निपटा जाएगा। क्योंकि दंगा करने वालों को न कोई धर्म होता है और न ही दंगाई किसी के दोस्त होते हैं।
उन्होंने कहा, उन्हें दंगा नहीं अमन-चैन चाहिए। साथ ही विरोधियों को भी ललकारा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार सिर्फ छह महीने की है। ऐसा कहने वालों- अगर कोई गड़बड़ी की तो सोच लो। छह महीने तो बहुत हैं, दो घंटे में भी सबक सिखा दिया जाएगा। सपा की सरकार फिर आएगी। कहा, उनकी सरकार में न किसी की चेन खिंची और न ही किसी की हत्या होती है। महिलाएं भी सड़क पर महफूज हैं।


Monday, 25 July 2016

अरबपति हीरा व्यापारी ढोलकिया का बेटा खोज रहा है नौकरी

अरबपति हीरा व्यापारी ढोलकिया का बेटा खोज रहा है नौकरी!!!!
 साल 2014 में अपने कर्मचारियों को दीवाली के मौके पर कार, फ्लैट्स और ज्वैलरी गिफ्ट में देकर चर्चा में आए सूरत के प्रसिद्ध हीरा व्यापारी सावजीभाई ढोलकिया एक बार फिर अनूठा काम कर चर्चा में आ गए हैं।

हीरा व्यवसायी व हरिकृष्णा एक्सपोर्ट के चेयरमैन सावजीभाई ने अपने बेटे को केरल भेजा है। बेटे को केरल भेजने के बारे में ढोलकिया ने बताया कि वे चाहते हैं कि उनका बेटा छोटी-मोटी नौकर कर अपना गुजारा करे। मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे को धन की अहमियत का पता चले और जिंदगी में आने वाली चुनौतियां का सामना कैसे किया जाता है, ये भी वो सीखे।

उल्लेखनीय है कि अपने कर्मचारियों को डायमंड इंजीनियर कहने वाले ढोलकिया ने 1991 में अपने तीनों भाईयों के साथ मिलकर एक करोड रूपए की लागत से बिजनेस शुरू किया था। वर्तमान में इनका बिजनेस छह हजार करोड़ के लगभग है। कक्षा चार तक पढ़ाई करने वाले सोवजीभाई ने 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी।


Sunday, 24 July 2016

डॉ जाकिर नाइक का ऐलान, देश के 10 बड़े चैनलों पर करेंगे मानहानि का मुकदमा

डॉ जाकिर नाइक का ऐलान, देश के 10 बड़े चैनलों पर करेंगे मानहानि का मुकदमा


मुंबई: प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान डॉ जाकिर नाइक ने मदीना से स्काइप के जरिए प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और मीडिया के सवालों का खुलकर जवाब दिया। उन्होंने मीडिया में खुद पर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई पेश करते हुए कहा कि देश के 10 बड़े चैनलों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने वाला हूँ। उन्होंने कहा कि मीडिया ने मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करने और इसे पृष्ठभूमि से बाहर ले जा कर दिखाया। मेरी भाषणों के साथ छेड़छाड़ की गई।
डॉ नाइक ने सभी तरह के आतंकवादी घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि यदि सकारात्मक सोच और किसी पूर्वाग्रह के बिना मेरे बयानों का विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि शांति का पैग़म्बर हूँ।
ओसामा को आतंकवादी नहीं मानने वाले बयान से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बयान 1998 का है, जब 9/11 नहीं हुआ था और जो बयान दिखाया गया है, उसके साथ भी छेड़छाड़ की गई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में मैंने कहा था कि जो कोई भी बेगुनाहों को मार देता है, वह गलत है। मैं जॉर्ज बुश को आतंकवादी बताया था। इसके अलावा भी उन्होंने मीडिया के कई सवालों का जवाब दिया।

संतरे बेच कराया स्कूल का निर्माण,हौसला इंसान की सबसे बड़ी ताक़त

संतरे बेच कराया स्कूल का निर्माण,हौसला इंसान की सबसे बड़ी ताक़त 
 हजब्बा का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। शुरू में उन्होंने बीड़ी बनाने का काम किया। पर कहते हैं कि हौसला इंसान की सबसे बड़ी ताक़त है। हजब्बा ने तब संतरा बेचना शुरू किया तो लगा कि जैसे उनके जीवन जीने का मकसद ही बदल गया। हजब्बा कहते हैं
हजब्बा कहते हैं, “मैं कभी स्कूल नहीं गया। बचपन में ही ग़रीबी ने मुझे संतरे बेचने के लिए मजबूर कर दिया। एक दिन मैं दो विदेशियों से मिला, जो  कुछ संतरे खरीदना चाहते थे। उन्होने मुझसे अंग्रेजी में संतरे की कीमत पूछी, लेकिन मैं उन लोगों से बातचीत करने में असमर्थ था। वह दोनो मुझे छोड़ कर चले गए। मैं इस घटना के बाद अपमानित महसूस कर रहा था और मुझे शर्म भी आ रही थी की सिर्फ़ भाषा की वजह से उन्हें जाना पड़ा।”
हजब्बा नही चाहते थे कि कोई दूसरा भी इस अनुभव से गुजरे। इस वाकये के बाद उन्हें जीवन का मकसद मिल गया। उस दिन हजब्बा ने यह संकल्प लिया कि अपने गांव के ग़रीब बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण करा कर रहेंगे।
उनकी पत्नी मामूना अक्सर शिकायत करती थी कि उनके खुद के तीन बच्चे हैं, इसके बावजूद वह सारा पैसा दूसरों के लिए क्यों खर्च कर रहे हैं। लेकिन बाद में उन्होंने भी हजब्बा का सहयोग करना शुरू कर दिया।
1999 में हजब्बा के सपने ने धीरे-धीरे पंख फैलाना शुरू कर दिया। उन्होने अपने गांव में एक मदरसे की शुरुआत की। जब यह स्कूल शुरू हुआ था तो सिर्फ़ 28 छात्र थे।
हालांकि बाद में जब छात्रों की संख्या बढ़ने लगी, हजब्बा को लगा कि इस मदरसे को अब बेहतर स्कूल में तब्दील करना होगा। इसलिए वह खुद के जोड़े हुए एक-एक पाई उस स्कूल की इमारत और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उचित शिक्षा के लिए जमा करने लगे।
2004 में हजब्बा ने स्कूल के लिए एक ज़मीन का टुकड़ा खरीदा, लेकिन इतना काफ़ी नही था। उन्हें यह महसूस होने लगा कि उन्होंने अभी तक जो भी पूंजी जमा की है, वह स्कूल के भवन के निर्माण के लिए काफ़ी नही है। तब विवश होकर हजब्बा ने उद्योगपतियों और नेताओं से मदद की गुहार लगाई।
वह अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं “एक बार में पैसों के लिए एक बहुत धनी आदमी के पास गया, लेकिन उसने मेरी मदद करने की बजाय मुझ पर अपने पालतू कुत्ते छोड़ दिए।”
दृढ़ निश्चय के धनी हजब्बा हारने वालों में से नही थे। धीरे-धीरे उन्होंने इतने पैसे इकट्ठा कर लिए, जिसकी बदौलत ज़मीन पर एक छोटे से प्राथमिक विद्यालय का निर्माण किया जा सके।
उस वक़्त मीडिया ने भी रुझान दिखाना शुरू किया। सबसे पहले एक कन्नड़ अखबार ‘होसा दिगणठा’ ने हजब्बा की कहानी प्रकाशित की। जल्द ही उसके बाद, सीएनएन आईबीएन ने हजब्बा को ‘अपने असली हीरो’ पुरस्कार के लिए नामित किया। और स्कूल के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए नगद पुरस्कार प्रदान किया।
जल्द ही हर तरफ से मदद आने लगी। स्कूल को मान्यता भी मिल गई। आज यह स्कूल गांव के 1.5 एकड़ जमीन पर तैयार है। साथ ही यह प्राथमिक स्कूल अब माध्यमिक स्कूल में तब्दील हो चुका है।
इस सफ़र के बारे मे हजब्बा कहते हैं “मेरा कर्तव्य इस स्कूल का निर्माण कराना था। अब इसे मैनें सरकार को दे दिया है और वही अब इसका संचालन करती है। यह सिर्फ़ मुसलमानो के लिए नहीं है। यहां हर धर्म का बच्चा पढ़ता है।”
हजब्बा वाकई प्रशंसा के पात्र हैं। जब स्कूल का निर्माण हो गया, तब एक प्रस्ताव रखा गया था कि इस स्कूल का नाम हजब्बा के नाम पर रखा जाए, लेकिन वह सुर्ख़ियों में नही आना चाहते थे।
हजब्बा की कहानी यही ख़त्म नहीं होती, अब उन्होंने अपने गांव में एक सरकारी कॉलेज का निर्माण कराने की योज़ना बनाई है। इसके लिए उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है

Wednesday, 20 July 2016

कश्मीर में पेलेट गन्स प्रदर्शनकारियो के साथ साथ इंसानियत को भी कर रही घायल

कश्मीर में पेलेट गन्स प्रदर्शनकारियो के साथ साथ इंसानियत को भी कर रही घायल

 हिजबुल आतंकी बुरहान वाणी की मौत के बाद कश्मीर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे है. प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों पर पथराव कर रहे है, थानों को जला रहे है. कश्मीर में यह सिलसिला पिछले एक हफ्ते से जारी है. प्रदर्शन में हुई हिंसा में अब तक 36 लोग मारे जा चुके है वही 1500 लोग घायल है. बुरहान वाणी के बाद घाटी में जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है पेलेट गन्स.
कश्मीर में हो रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षाबल पेलेट गन्स का इस्तेमाल कर रहे है. पेलेट एक तरह के छर्रे होते है जो दुश्मन को टारगेट करके मारे जाते है. यह छर्रे टारगेट के शरीर में घुस जाते है. इन छर्रों से किसी की जान जाने का कोई खतरा नही है. शरीर में घुसने के बाद केवल सर्जरी से इनको निकला जा सकता है. पेलेट से दिए गए घाव को ठीक होने में 2 से 3 हफ्तों का समय लगता है
श्रीनगर के एक अस्पताल में एक 5 साल के बच्चे की आँख में छर्रे लगे हुए है. घायल बच्चा राजू के पिता सवाल करते है की इस बच्चे की क्या गलती है. क्या इन सब की जरुरत थी? वही एक 17 साल के युवक की आँखों की रौशनी जा चुकी है. यह भी सुरक्षाबलों की पेलेट गन का शिकार हुआ था. अगर आप इन पेलेट गन से घायल हुए लोगो की तस्वीर देख ले तो आपके रोंगटे खड़े हो जायेगे. अगर निर्दोष लोग भी इस तरह सुरक्षाबलों का शिकार बनेगे तो उनमे इनके प्रति और नफरत बढ़ेगी.

Sunday, 3 July 2016

Saudi Arabia Eid Celebration Saudi Arabia Eid Celebration

Eid ul-Fitr is a festival that is celebrated with immense splendor in Saudi Arabia. Saudis will beautify their houses and prepare lavish meals for friends and family. The entire country gets occupied in untainted celebrations during Eid. The countless Saudi Arabia events & festivals include the Eid ul-Adha and Eid ul-Fitr festivals.
Eid celebrations in Saudi Arabia may fluctuate culturally depending upon the province, but one universal thread in every celebration is that the hospitable traditions and generosity of the Saudi citizens become quite noticeable during Eid. First, it is general Saudi custom for families to collect at the patriarchal home following the Eid prayers. Prior to the special Eid food is served, little children will stand in front of every adult member of family who distribute Riyals (Saudi currency) to the kids. Members of Family will also usually have an occasion where they will give out gift packs to the children. These packs are often marvelously decorated and are full of toys and candies.
Even numerous shopkeepers will display their generosity at Eid giving free Eid presents with every purchase. For instance, during Eid, numerous of the chocolate outlets will give every customer who buys a range of candies a complimentary crystal candy plate with all purchase.
In the mood of Eid, several Saudis go to great length to show their generosity and kindness. It is ordinary for even absolute strangers to address one another indiscriminately, even by occupants of motor vehicle waiting at signals. Sometimes even gifts and toys are given to children by absolute strangers.
It is also conventional in some regions for Saudi gentleman to go and purchase huge quantities of rice and other stuffs and then anonymously leave them at the gate of the less-fortunate. moreover, in some region in the central of Saudi Arabia, for example, Al Qassim, it's a frequent tradition that at the Eid's morning and subsequent to the Eid prayer natives will put huge rugs on one of lanes of their locality and every household will organize a large serving of food where all neighbors will share foods, it's also a general practice that citizens will exchange places to endeavor more than one type of meal.

Eid Ul Fitr Islamic Tradition

Eid-ul-Fitr marks the end of holy month of fasting, the Ramadhan. Eid-ul-Fitr is a celebration concluding the Islamic blessed month of Ramadan, in which Muslims are required to fast in all days of Ramadhan from dawn to dusk, refraining from beverages, foods, assisting the underprivileged and engaging in some kind of community services. The advantages of this form of fasting helps in strengthening and increasing moral character, appreciating the everyday blessings of food and beverages, and sympathizing with the person who are less fortunate or underprivileged. This joyful and blissful day is celebrated to give thanks to Almighty for his blessings in the holy month of Ramadhan. Muslim grace with presence at the congregational prayer service that held in the morning.
As per Islamic tradition Muslims of all age group wear new clothes, cook some delicious and tasty food, and invite relative, friends and neighbors to celebrate the auspicious day with them. Fasting in Ramadhan encourages sympathy for needy and hungry and motivates Muslims to donate very generously to all underprivileged.  Fasting has to do with aspects of fast which expresses many basic values of Muslim community such as charity, empathy for poor and needy persons, steadfastness, worship, patience etc. There are lots of things which revolve around this festivity. Fasting is believed by some scholars to praise fundamental distinctions and lauding the power of religious realm, while admitting the subordination of physical realm.  It also instructs Muslims to stay away from the worldly life and desires and to only focus on the Almighty God and thank for blessings received. This is a rejuvenation of this religion and creates an even stronger bond between individual person and the Almighty God. After the end of this holy month of Ramadhan, is a vast and big merriment of Eid-ul-Fitr.
Socialization is one such thing that is required in every society, and for the promotion of mutual understanding and harmony. It is necessary for healthy and sound social life as it motivates people to live their life in cohesive bond. In addition, religious gathering in festivals is the most effective way of doing so. Religious gathering is different from simple gathering as religious gathering is called as gathering plus. Eid-ul-Fitr gives color of sanctity and harmony among the people and conveys message in its own sense