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Saturday, 16 April 2016

मैंने इस्लाम इस लिए अपनाया ,क्युकी इस्लाम में औरतो को मर्दो से ज़्यादा इज़्ज़त मिलती है :डॉक्टर लिसा

मैंने इस्लाम इस लिए अपनाया ,क्युकी इस्लाम में औरतो को मर्दो से ज़्यादा इज़्ज़त मिलती है :डॉक्टर लिसा

विशेष। डॉक्टर लिसा एक अमेरिकी महिला डॉक्टर हैं, लगभग तीस साल पहले मुसलमान हुई हैं और मुबल्लिगा हैं, यह इस्लाम में महिलाओं के अधिकार के संबंध में लगने वाले आरोपों का दान्दान शिकन जवाब देने के संबंध में काफी प्रसिद्ध हैं।
उनके एक व्याख्यान के अंत में उनसे सवाल किया गया कि आप ने एक ऐसा धर्म क्यों स्वीकार किया जो औरत को मर्द से कम अधिकार देता है ??
उन्होंने जवाब में कहा कि मैंने तो जिस धर्म को स्वीकार किया है वह स्त्री को पुरुष से अधिक अधिकार देता है, पूछने वाले ने पूछा वो कैसे?
डॉक्टर साहिबा ने कहा सिर्फ दो उदाहरण से समझ लीजिए, पहली यह कि इस्लाम ने मुझे चिंता आजीविका से मुक्त रखा है यह मेरे पति की जिम्मेदारी है कि वह मेरे सारे खर्च पूरे करे, चिंता आजीविका से बड़ा कोई सांसारिक बोझ नहीं और अल्लाह हम महिलाओं को इससे पूरी तरह से मुक्ति रखा है, शादी से पहले यह हमारे पिता की जिम्मेदारी है और शादी के बाद हमारे पति की।
दूसरा उदाहरण यह है कि अगर मेरी संपत्ति में निवेश या संपत्ति आदि हो तो इस्लाम कहता है कि यह सिर्फ तुम्हारा है तुम्हारे पति का इसमें कोई हिस्सा नहीं है,जबकि मेरे पति को इस्लाम कहता है कि जो आप ने कमा और बचा रखा है यह सिर्फ तुम्हारा बल्कि तुम्हारी पत्नी का भी है अगर आप ने उसका यह हक़ अदा न किया तो मैं तुम्हें देख लूंगा।

कुरआन में बताया की आत्महत्या करना पाप , कुरआन का दिया हवाला , किसान ना करे आत्महत्या: नाना पाटेकर

कुरआन में बताया की आत्महत्या करना पाप , कुरआन का दिया हवाला , किसान ना करे आत्महत्या: नाना पाटेकरअभिनेता नाना पाटेकर बेहद भावुक व्यक्ति माने जाते हैं, लेकिन शायद ही किसी ही उन्हें आंसू भरी आंखों में देखा होगा। महाराष्ट्र में पड़ रहे भीषण सूखे पर एनडीटीवी से बातचीत में उनकी रुंधी आवाज साफ सुनी जा सकती है।

‘किसान हैं कोई भिखारी नहीं’
अहमदनगर में इस अभिनेता ने कहा कि सूखा पीड़ित इलाकों से बड़े पैमाने पर लोगों का शहरों में पलायन हो रहा है। अगर कोई आपके कार की खिड़की पर आए तो उनसे भिखारियों जैसा व्यवहार नहीं करें। वे किसान हैं कोई भिखारी नहीं।’ इस साथ ही उन्होंने कहा, ‘वे मजबूर हैं। उन्हें  खाने, पानी और शौचालयों की जरूरत है। हमें ऐसे किसी एक की तो जिम्मेदारी उठानी चाहिए। यह मुश्किल नहीं।’
Nana Patekar Farmer Suicide
आईपीएल शिफ्ट करना भावनात्मक मुद्दा
पाटेकर ने कहा कि महाराष्ट्र को आईपीएल मैचों की मेजबानी नहीं करनी चाहिए थी। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएल के 13 मैचों को राज्य से बाहर कराने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश से भी कुछ ज्यादा फायदा नहीं होने वाला. लेकिन यह संकेतिक कदम है। वह कहते हैं, ‘क्या आईपीएल के मैच नहीं होंगे, तब मैदानों में पानी नहीं डाला जाएगा? लेकिन यह एक भावनात्मक मुद्दा है। जब लोग मर रहे हैं, तो हम जश्न कैसे मना सकते हैं?’
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मौसम विभाग द्वारा जारी सामान्य से बेहतर मानसून के पूर्वानूमान का स्वागत करते हुए पाटेकर कहते हैं कि अगर पहले ही कदम उठाए जाते तो लातूर के प्यासे लोगों के लिए ट्रेन से पानी भेजने की जरूरत नहीं होती।
हम भी फेल हुए और हमारे नेता भी
वह कहते हैं, ‘आने वाले दो महीने बेहर ही मुश्किल भरे होने वाले हैं। अगर हम पहले ही कदम उठाते, तो वाटर ट्रेन भेजने की जरूरत नहीं होती। एक व्यक्ति के तौर पर हम भी और हमारे नेता भी (इस मामले में ) फेल हुए हैं।’
सिस्टम पर सवाल जरूर उठाना चाहिए
पाटेकर कहते हैं, ‘लोग चिंतित हैं। लेकिन उन्होंने यह पहली बार नहीं देखा है। उन्हें यहां (मराठवाड़ा) आना चाहिए। लोगों को सिस्टम पर सवाल जरूर उठाना चाहिए। चुप रहना एक अपराध है। क्या हम अंधे हैं, जो मर रहे लोगों को नहीं देख सकते? अगर वे हमारे लोग नहीं, तो फिर वह हैं कौन?’
उन्होंने बस सनसनीखेज खबरों पर ध्यान देने को लेकर मीडिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘यह दुख की बात है कि प्रत्यूषा (बनर्जी) ने आत्महत्या कर ली। लेकिन इसे हर दिन पहले पन्ने पर ही होना चाहिए। इंद्राणी (मुखर्जी) ने कितनी बार शादी की, यह जानने की किसे पड़ी है? मुझे तो अखबार पढ़ना ही पसंद नहीं।’

नाना पाटेकर और उनके साथी मकरंद अनसपुरे ने आत्‍महत्‍या करने वाले किसानों के एक एक परिवार के पास जा कर उन्‍हें अपने हाथें से सहायता राशि का चेक पकड़ाया ये सभी परिवार लातूर में एक होटल के सभागार में एकत्रित हुए थे। इससे पहले वे विदर्भ इलाके में किसानों के परिवारों को सहायता राशि वितरित कर चुके हैं।  इस मौके पर नाना ने कहा कि वो तो एक पोस्‍टमैन हैं जो लोगों के द्वारा आ रही मदद को किसानों तक पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि ये एक गंभीर समस्‍या है और वे चाहते हैं इससे मुकाबला करने के लिए सभी बड़े राजनैतिक दल जैसे कांग्रेस, एनसीपी और भाजपा आपसी मतभेद भूल एक साथ समस्‍या का सामना करने के लिए आगे आयें, हालाकि वो नहीं जानते कि उनका ये सपना कभी पूरा होगा भी कि नहीं।
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कुरान का हवाला दे कर किसानों से आत्‍महत्‍या ना करने की अपील की
नाना पाटेकर ने बताया कि आत्‍महत्‍या करने वाले किसानों में मुस्‍लिम किसानो की संख्‍या ना के बराबर है क्‍योंकि उनके पवित्र ग्रंथ कुरान में आत्‍महत्‍या को पापा बताया गया है जिससे ईश्‍वर के नियमों की अवहेलना होती है। उन्‍होंने कहा कि क़ुरान उनके दिल के बहुत क़रीब है तथा ये विचार बेहद पसंद आया और वे चाहते हैं कि किसानों को इसे समझना चाहिए और किसी भी हालत में हथियार नहीं डालने चाहिए बल्‍कि परिस्‍थितियों का सामना करना चाहिए।

नरेन्द्र मोदी को लग सकता है झटका : गुजरात में 94% लोग हिन्दू धर्म छोड़ रहे है ..... पढ़े पूरी खबर!

नरेन्द्र मोदी को लग सकता है झटका : गुजरात में 94% लोग हिन्दू धर्म छोड़ रहे है नई दिल्ली : इस पोस्ट की हैडिंग सुनकर शायद आपको भी झटका लगा होगा लेकिन ऐसा नही है की गुजरात के सभी हिन्दुओं में 94 फीसदी लोग धर्म छोड़ रहे है। बल्कि यहाँ बताया गया है की पिछले 5 सालों में, गुजरात की सरकार को अलग अलग धर्मों से ऐसे 1,838 लोगों के आवेदन मिले जो अपना धर्म बदलना चाहते थे। और इसमें से1,735 आवेदन (94.4%) ऐसे लोगों के थे जिनका धर्म हिंदू था।



गुजरात के धर्मांतरण विरोधी कानून के अंतर्गत किसी भी शख्स को धर्म बदलने से पहले जिला अथॉरिटी की अनुमति की जरूरत होती है। राज्य सरकार ने इनमें से आधे लोगों के आवेदन स्वीकार नहीं किएसिर्फ 878 लोगों को ही धर्म बदलने की अनुमति दी गई।

1,735 हिंदुओं के अलावा57 मुस्लिम42 ईसाई और 4 पारसियों ने भी धर्म बदलने के लिए आवेदन दिया था। बुद्ध और सिख धर्म से किसी भी तरह का आवेदन नहीं मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ आवेदन के पीछे शादी बड़ी वजह होती है।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुओं की तरफ से आए आवेदन राज्य में इस धर्म के अनुपात से थोड़े ज्यादा ही थे। यह आवेदन मुख्य रूप से सूरतराजकोटपोरबंदरअहमदाबादजामनगर और जूनागढ़ से थे। एक्सपर्ट मानते हैं कि प्रशासन सभी आवेदन का रिकॉर्ड नहीं रखता है।

गुजरात दलित संगठन के अध्यक्ष जयंत मनकंडिया कहते हैं, ‘अगर सरकार सिर्फ 1,735 आवेदनों के ही हिंदू धर्म के लोगों के होने की बात कर रही है तो साफ है कि प्रशासन से सभी आवेदन का रिकॉर्ड नहीं रखा है।

मनकंडिया ने आगे कहा कि अगर सही आंकड़े दिखाए जाते तो हिंदू धर्म के लोगों के आवेदन की संख्या लगभग 50 हजार रहती।

और उन्होंने जूनागढ़ में कुछ साल पहले हुए एक कार्यक्रम का हवाला दिया जिसमें दलित समुदाय के लगभग एक लाख लोगों ने बौद्ध दीक्षा ली थी

नेपाल में स्वाइन फ्लू ने की एंट्री !

भारत से सटे नेपाल के जिलों में स्वाइन फ्लू ने अपना प्रकोप फैकना शुरू कर दिया है ! पोखरा , पाल्पा जिलों में स्वयंव फ्लू तेज़ी से फ़ैल रहा...