propeller

Tuesday, 12 April 2016

रोहिता वेमुला की मां राधिका ने की हिन्दू धर्म छोड़ने की घोषणा, अपनाएंगी यह धर्म

रोहिता वेमुला की मां राधिका ने की हिन्दू धर्म छोड़ने की घोषणा, अपनाएंगी यह धर्म

नई दिल्ली। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में 17 जनवरी 2016 को फांसी लगाने वाले दलित स्कॉलर रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला ने हिंदू धर्म छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म में जन्मगत आधार पर भेदभाव की व्यवस्था है। वह इससे मुक्ति चाहती हैं। 14 अप्रैल को वह बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेंगी।
Rohit Vemula Mother
इंडिया टुडे मैग्ज़ीन के पूर्व प्रबंध संपादक दिलीप मंडल समेत कई लोगों ने राधिका वेमुला को बधाई दी है। दिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है, ‘ताजा खबर यह है कि मां राधिका वेमुला ने हिंदू धर्म से छुटकारा पाने का फैसला किया है। वे 14 अप्रैल को बौद्ध धर्म स्वीकार करेंगी। जन्मगत भेदभाव से मुक्ति का राधिका वेमुला का मार्ग मंगलमय हो. साधु, साधु।’
रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के बाद से देशभर में उन्हें इंसाफ दिलाने की मुहिम चल रही है। उनकी मां राधिका वेमुला भी इन आंदोलनों में हिस्सा ले रही हैं। वो दिल्ली में इंडिया गेट से लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया है।
माना जाता है कि रोहित वेमुला ने जातिगत उत्पीड़न के चलते ख़ुदकुशी की थी लेकिन बाद में उनकी जाति पर विवाद हो गया था। दावा किया जा रहा था कि वह दलित नहीं ओबीसी हैं। इस विवाद पर विराम लगाने के लिए उनकी मां राधिका सामने आईं। उन्होंने कहा, रोहित के पिता वेदारा समुदाय के थे जिसे तेलंगाना में पिछड़ी जाति का दर्जा हासिल है लेकिन अपने आख़िरी बच्चे को जन्म देने के बाद मैं निजी कारणों से अपने पति से अलग हो गई। तीनों बच्चों को मैंने अपने साथ रखा। उसके बाद मैं अनुसूचित जाति (माला) इलाक़े में रहने लगी क्योंकि मैं जन्म से ही माला समुदाय की हूँ।
रोहित की मां ने हैदराबाद विश्वविद्याल से आठ लाख रुपए बतौर मुआवज़ा लेने से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने मुआवज़े की बजाय न्याय को तरजीह दी। रोहित वेमुला के लिए अभी भी आंदोलन जारी है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्र और प्रशासन लगभग आमने-सामने हैं। उनकी मांगों में वाइस चांसलर अप्पा राव को हटाया जाना भी शामिल है।

पर्स चुराते रंगे हाथ पकड़ा गया यूपी पुलिस का सिपाही

देवरिया जिले के सदर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने यूपी पुलिस के एक सिपाही को महिला का बैग चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. उसका नाम मदन निषाद बताया जा रहा है. सिपाही के पास से यात्री का चोरी किया गया पर्स भी बरामद हुआ है. इसके बाद यात्रियों ने सिपाही की जमकर धुनाई पर कर दी.
ग्वालियर-बरौनी ट्रेन में नेहा नाम की महिला अपने परिवार के साथ कानपुर स्टेशन से देवरिया आने के लिए एसी बोगी मे चढी. खलीलाबाद स्टेशन पर ट्रेन की बोगी में एक पुलिसवाला दाखिल हुआ. पता चला कि वो बस्ती जिले के पुरानी बस्ती थाने में सिपाही पद पर तैनात है औऱ उसका नाम मदन निषाद है. वो भी देवरिया आने के लिए ग्वालिर-बरौनी ट्रेन में चढ़ा.

पीड़ित महिला ने बताया कि जब बोगी में एक महिला ने सिपाही को पर्स चोरी करते हुए रंगे हाथ पकङा तो नेहा ने भी अपना बैग चेक किया तो उसका पर्स गायब मिला. पर्स में महिला ने लाखों रुपये का सामान रखा था. पकड़े जाने पर जब आरोपी सिपाही की तलाशी ली गई तो नेहा नाम की महिला का पर्स सिपाही के बैग से निकला.
इसके बाद ट्रेन में बैठे यात्रियों ने आरोपी सिपाही मदन निषाद की जमकर पिटाई कर दी, जिससे उसकी वर्दी फट गई. आरोपी सिपाही कुशीनगर जिले का रहने वाला है. यात्रियों की शिकायत के बाद देवरिया जीआरपी आरोपी सिपाही को जेल भेज रही है.

मोहम्मद रईस ने रचा इतिहास , पानी से चलने वाली गाड़ी बना डाली, इस भारतीय मुस्लिम को सलाम|

 : मोहम्मद रईस ने रचा इतिहास , पानी से चलने वाली गाड़ी बना डाली, इस भारतीय मुस्लिम को सलाम|

अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में ऑड – इवन रूल लगाया, जिससे दिल्ली का प्रदूषण काबू में लाया जा सके. लेकिन अगर ऐसा हो जाए कि पेट्रोल और डीज़ल की जगह पानी से चलने वाली गाड़ियाँ बन जाए तो प्रदूषण तो ख़त्म ही हो जाएगा न?
मिलिए सागर, मध्य प्रदेश के मोहम्मद रईस मरकानी से, जिन्होंने बनायी है पानी से चलने वाली गाड़ी। यह रिमोट कंट्रोल से भी चल सकती है और अधिकतम गति 50 – 60 किमी प्रति घंटा चल सकती है.
Water-Fuelled-car
रईस ने 2007 में बिना किसी आर्थिक सहायता से यह प्रयोग पानी और कैल्शियम कार्बाइड मिलाकर शुरू किया था. इससे निकलने वाली एसेटेलीन गैस की सहायता से रईस ने इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करके एक इंजन बनाया, जो पानी से चलता था!
रईस ने इसके बाद 796 cc का इंजन बनाया, जो मारुती आल्टो कार के इंजन के बराबर था. रईस ने कार की टेस्टिंग शुरू की और पाया कि उनके बनाए इंजन से गाड़ी 50-60 किमी प्रति घंटा की गति से चल सकती है. रईस ने गाड़ी को अपने मोबाइल फ़ोन से कण्ट्रोल करना भी शुरू किया और इसमें भी वह सफल रहे.
रईस मरकानी के इस प्रयोग की खबर जब विदेशों में पहुंची तो उन्हें चीन और दुबई से ऑफर आने शुरू हो गए, लेकिन रईस ने नम्रतापूर्वक इन सारे ऑफर्स को ठुकरा दिया, क्यूंकि वह इसे भारत देश में ही बनाना चाहते थे.

नेपाल में स्वाइन फ्लू ने की एंट्री !

भारत से सटे नेपाल के जिलों में स्वाइन फ्लू ने अपना प्रकोप फैकना शुरू कर दिया है ! पोखरा , पाल्पा जिलों में स्वयंव फ्लू तेज़ी से फ़ैल रहा...