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Monday, 11 April 2016

दूध वालों और सब्जी वालों की हड़ताल में तो कुछ ऐसा होता है...

BIG HIT: दूध वालों और सब्जी वालों की हड़ताल में तो कुछ ऐसा होता है...

 दूध वालों और सब्जी वालों की हड़ताल में तो कुछ ऐसा होता है...

जब दूधवाले हड़ताल करते हैं तो दूध सड़कों पर ढोल देते हैं।
सब्जीवाले हड़ताल करते हैं तो सब्जी सड़कों पर फेंक देते हैं।
पर, न जाने क्यों ये सुनार ऐसा नहीं कर रहे हैं।
आकाश टेवरे, भोपाल
 
एक आदमी टीवी देखते हुए कह रहा था नहीं....नहीं....नहीं ऐसी गलती मत करना... मैं कह रहा हूं घोड़े से मत उतर।
प्लीज घोड़े से मत उतर, वरना बरबाद हो जाएगा।
इतने में बीबी आ गई, पूछा क्या देख रहे हो?
पति - अपनी शादी की डीवीडी
राहुल जैन, इंदौर
 
ब्वॉय सूखी-सूखी सड़कों पर मैं तेरा इंतजार करुं...सनम रे सनम रे....
गर्ल- गलत गा रहे हो...
भीगी-भीगी सड़कों पर मैं तेरा इंतजार करुं..... ऐसा है ये गीत
ब्वॉय- ओ श्यानी...गर्मी आई है....तेरे पापा आएंगे क्या पानी डालने...बड़ी आई भीगी-भीगी सड़कों वाली...

OMG: पट्रोल पंप पर जाकर लड़की ने किया मोल-भाव तो हुआ कुछ ऐसा!

OMG: पट्रोल पंप पर जाकर लड़की ने किया मोल-भाव तो हुआ कुछ ऐसा!

OMG: पट्रोल पंप पर जाकर लड़की ने किया मोल-भाव तो हुआ कुछ ऐसा!

गर्ल- 1 लीटर पेट्रोल कितने का है भैया?
डिलिवरी मैन- 65.32 रुपए लीटर है मैम?
गर्ल- 2 लीटर लेना है, ठीक से लगा लोपरमानेंट कस्टमर हैं आपके।
डिलिवरीमैन बेहोश
 
आपको पता है की पॉपकोर्न को गर्म तवे पर रखने पर
वो उछलते क्यों है? नहीं पता...?
कभी खुद बैठकर देखना, पता चल जाएगा।
 
सच्चा प्यार वही होता है, जब लड़के के पास कोई पुराना स्कूटर हो और लड़की उस पर बैठकर घूमने को राजी हो जाए बाकी सब तो मोह माया है। पता नहीं लोगों को सच्चा प्यार कैसे मिल जाता है, मुझे तो सेलो टेप का छोर तक एक बार में नहीं मिलता।
 
जब आप किसी शादी में जाते हैं और दूल्हे की मां कहती है, बेटा, खाना खाए बिना मत जाना..!
फिर आप मन ही मन बोलते हैं मैं तो आया ही खाना खाने था।

'आईपीएल की तर्ज पर काम कर रहे हैं केरल के मंदिर'

'आईपीएल की तर्ज पर काम कर रहे हैं केरल के मंदिर'

दक्षिणी राज्य केरल का मंदिर अपनी आतिशबाजी के लिए ही मशहूर था। मगर रविवार को पुत्तिंगल देवी मंदिर हादसे में सौ से ज़्यादा दुखद मौतों ने इसे दुनियाभर में आतिशबाजी के बुरे नमूने के तौर पर चर्चित कर दिया है। कोल्लम के सांसद एन के प्रेमचंद्रन कहते हैं, ''इस मंदिर को किसी दूसरे मंदिर की तरह एक सामान्य मंदिर के तौर पर ही लिया जाता है।

आप इसकी मशहूर गुरुवयूर मंदिर से तुलना नहीं कर सकते और इस तरह के किसी अन्य मंदिर से भी नहीं। देवी को खुश करने के लिए वे आतिशबाजी करते हैं।'' इस मंदिर की जो विशेषता लोकप्रिय हुई है वह है यहां की 'आतिशबाजी प्रतियोगिता' जो हर साल इन महीनों में मंदिर महोत्सव के बाद होती है। इस तरह इसे ''मीनाम भारानी महोत्सव'' नाम मिला। प्रतियोगिता में दो टीमें भाग लेती हैं, जो मंदिर महोत्सव में शामिल होने वालों को अपने हुनर से ताज्जुब में डालने को तैयार रहती हैं। इस प्रतियोगिता में अलग-अलग की आतिशबाजी होती है।

ये ऐसी प्रतियोगिता थी, जिस पर जिला प्रशासन ने पुत्तिंगल देवी मंदिर में रोक लगा रखी थी। मंदिर में 10-15 साल पहले भी ऐसी दुर्घटना हो चुकी थी, जिसमें कम लोग घायल हुए थे। मगर मंदिर कमेटी ने प्रतियोगिता को जारी रखा। इसका बड़ा कारण यहां पटाखों का बड़ी मात्रा में एकत्र होना भी रहा। ऐसा कई बार हुआ था जब ये निर्धारित मात्रा से बहुत अधिक थे।सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक राहुल इश्वर ने बीबीसी को बताया, ''केरल के मंदिरों में जो हो रहा है, वह इंडियन प्रीमियर लीग और टी20 प्रतियोगिता में जो हो रहा है वैसा ही है। मंदिर कॉर्निवाल की जगह लेने लगे हैं। ऐसी आतिशबाजी और प्रतियोगिता के लिए कोई वैदिक नियम नहीं है।''

इसे साबित करने के लिए राहुल कहते हैं, ''केरल में आठ से नौ हजार मंदिर हैं, जिनमें से ढाई हजार पर सरकार का नियंत्रिण है। हर कोई मनोरंजन पसंद करता है। इसलिए भक्तों को आकर्षित करने के लिए आपको कुछ करना पड़ता है। आतिशबाजी इसमें एक है। कुछ मंदिर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आड़ में सिनेमा का नाच भी करवाते हैं।''

राहुल कहते हैं, ''यह गंभीर मुद्दा है। यहां न गीता के उपदेश हैं, न धार्मिक मूलग्रंथ और न योग आधारित शिक्षा है। कुछ कल्याणकारी गतिविधियां होनी चाहिए, नहीं तो आपके भक्त आपको छोड़ देंगे।'' सबरीमाला मंदिर से जुड़े राहुल कहते हैं कि पांच दशक पहले एक दुर्घटना में 68 लोगों की मौत के बाद उस मंदिर में आतिशबाजी बंद कर दी गई थी।

लेकिन राहुल की बात नकारते हुए त्रावणकोर देवासम बोर्ड अध्यक्ष प्रयार गोपालकृष्णन के मुताबिक, ''हम लोग इस रिवाज को बंद करने को तैयार नहीं। हम लोग कोई प्रतियोगिता नहीं करेंगे, लेकिन हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह प्रथा चलती रहेगी।

38% of people over 30 in KSA are diabetics

38% of people over 30 in KSA are diabetics

RIYADH: Around 38 percent of people aged 30 and above in the Kingdom suffer from diabetes and concerted efforts are being made to fight the disease, Dr. Hisham Al-Khashan, the assistant deputy minister of health for primary health care centers, has said.
Speaking at a campaign launched on the occasion of World Diabetic Day on Thursday, he said that around 90 percent of patients have type two of the disease. “Poor eating habits, lack of physical exercise and obesity are the main causes of the disease.”
The event, organized by the Health Ministry in collaboration with Abbott Company under the motto “Sahsehlo (Beware of diabetes)” at the King Abdullah Park, was attended by senior Health Ministry officials, physicians, families and individuals.
“As an enormous responsibility for the situation of diabetes in the country, the ministry has established the national program for awareness on diabetes,” he said. “The program, launched a few years ago, is aimed at educating patients the side effects of the disease and ways to control it, enabling them to properly use medical devices to monitor their condition,” he said.
Al-Khashan said that diabetes is a chronic disease that forms over a long period of time due to a number of factors. Hence, the cooperation of people and the entire community is critical for combating it.
“Although the ministry is doing its best to face the disease, we still experience a severe shortcoming because of the lack of qualified medical personnel for handling diabetes in our health care centers,” he said.
“To solve this problem, the Health Minister has issued directives to all departments to hire the best consultant physicians at primary health care centers in major cities by attracting them with competitive salaries so their centers can work as referral, benchmark, and training centers in handling diabetes. This will help in training even more Saudis so that we are able to post them to centers suffering from a lack of qualified diabetes doctors,” said Al-Khashan.
Dr. Fatima Yosuf Al-Saleel, the director of the National Program for combating diabetes, told reporters that diabetes is still a hidden epidemic in the Kingdom as many people remain untested for the disease. “Preventing or even simply delaying the disease is possible by taking simple measures in terms of improving one’s lifestyle. These measures include maintaining a healthy weight, taking physical exercises for at least 30 minutes, three to four days a week; following a healthy diet consisting mostly of vegetables and fruits, and decreasing the intake of sugars and unhealthy fats as much as possible,” she said.

नेपाल में स्वाइन फ्लू ने की एंट्री !

भारत से सटे नेपाल के जिलों में स्वाइन फ्लू ने अपना प्रकोप फैकना शुरू कर दिया है ! पोखरा , पाल्पा जिलों में स्वयंव फ्लू तेज़ी से फ़ैल रहा...