propeller

Saturday, 6 February 2016

सिद्धू को ‘आप’ में जाने से रोकने के लिए बीजेपी ने दिया बड़ा ऑफर

पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी कोई जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं है। पार्टी ने हाल ही में आप (आम आदमी पार्टी) में शामिल होने के संकेत देने वाले अपने नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को राज्य में पार्टी प्रचार अभियान प्रमुख बनने का प्रस्ताव दिया है।
पार्टी ने पहली बार इस तरह का पद बनाया है और इससे साफ संकेत मिलते हैं बीजेपी सिद्धू को आम आदमी पार्टी का दामन थामने से रोकना चाहती है।
 बीजेपी के पंजाब प्रभारी प्रभात झा ने राजधानी दिल्ली में पिछले 2 हफ्तों में 2 बार सिद्धू के घर जाकर उनसे मुलाकात की। सिद्धू के साथ उनकी हालिया बैठक पंजाब बीजेपी प्रमुख का चुनाव करने के लिए दिल्ली में राज्य के नेताओं के पहुंचने से महज कुछ घंटे पहले हुई।
बता दें कि आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की 14 जनवरी को मुक्तसर जिले में हुई सभा के बाद पंजाब के राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगले विधानसभा चुनाव की दौड़ में आप बाकी सभी दलों से आगे निकल रही है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ऐसे हालात में सिद्धू का पार्टी से अलग होना आम आदमी पार्टी को और मजबूती देगा, जो अपने तगड़े प्रचार अभियान के बावजूद अबतक मुख्यमंत्री पद के लिए अपना चेहरा नहीं तलाश पाई है।

‘कुरान आधारित है मुस्लिम पर्सनल लॉ, बदला नहीं जा सकता’ – जमीयत उलेमा-ए-हिंद

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के प्रति लिंगभेद समेत विभिन्न मसलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका में शुक्रवार को मुस्लिम संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को पक्षकार बनने की अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति आर भानुमति की 3 सदस्यीय पीठ ने केंद्र और इस संगठन को 6 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मूल अधिकारों में दखल नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल और नैशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी को जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या जो मुस्लिम महिलाएं भेदभाव की शिकार हो रही हैं, उसे उनके मूल अधिकार का उल्लंघन नहीं मानना चाहिए और क्या यह अनुच्छेद-14 (समानता) और 21 (जीवन के अधिकार) में दखल नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कहा गया है लड़की को पैतृक संपत्ति में हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत समान अधिकार मिलने चाहिए। कई मामलों में मुस्लिम महिलाओं को पति से मिलने वाले मनमाने तलाक और दूसरी शादी करने जैसे मामले में पहली पत्नी के लिए सेफगार्ड नहीं है।
चुनौती नहीं दी जा सकती
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की याचिका के अनुसार सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पर्सनल लॉ में प्रचलित शादी, तलाक और गुजारा भत्ते के चलन की संवैधानिक वैधता की परख नहीं कर सकता है क्योंकि पर्सनल कानूनों को मौलिक अधिकारों के सहारे चुनौती नहीं दी सकती।
धर्मग्रंथ से पर्सनल लॉ
जमीयत उलेमा-ए-हिंद का कहना है कि पर्सनल लॉ को इस आधार पर वैधता नहीं मिली है कि इन्हें किसी कानून या सक्षम अधिकारी ने बनाया है। पर्सनल लॉ का मूलभूत स्रोत उनके अपने धर्मग्रंथ हैं। मुस्लिम कानून मूलरूप से पवित्र कुरान पर आधारित है और इसलिए यह संविधान के अनुच्छेद 13 में उल्लिखित ‘लागू कानून’ की अभिव्यक्ति के दायरे में नहीं आ सकता। इसकी वैधता को संविधान के भाग-3 के आधार पर दी गयी चुनौती पर नहीं परखा जा सकता।

नेपाल में स्वाइन फ्लू ने की एंट्री !

भारत से सटे नेपाल के जिलों में स्वाइन फ्लू ने अपना प्रकोप फैकना शुरू कर दिया है ! पोखरा , पाल्पा जिलों में स्वयंव फ्लू तेज़ी से फ़ैल रहा...